श्री जगन्नाथ भगवान के प्रचलित रहस्य और प्रभु श्रीकृष्ण के लीला प्रयाण के सन्दर्भ में
श्री जगन्नाथ भगवान के प्रचलित रहस्य और प्रभु श्रीकृष्ण के लीला प्रयाण के सन्दर्भ में "भगवान् कृष्ण ने जब देह छोड़ा तोह उनका अंतिम संस्कार किया गया , उनका सारा शरीर तो पांच तत्त्व में मिल गया लेकिन उनका हृदय बिलकुल सामान्य एक जिन्दा आदमी की तरह धड़क रहा था और वो बिलकुल सुरक्षित था , उनका हृदय आज तक सुरक्षित है जो भगवान् जगन्नाथ की काठ की मूर्ति के अंदर रहता है और उसी तरह धड़कता है , ये बात बहुत कम लोग को पता है " इस तरह की भ्रामक और घृणित बातें सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचारित की जा रही हैं। सत्य हालांकि इन दावों से परे है। सत्य को जानने और समझने के लिए निम्न को समझना आवश्यक है। १. श्रीमद भागवत महापुराण के माहात्म्य में प्रभु श्री कृष्णा को सत चिद और आनंद का स्वरुप कहा गया है। सत का तात्पर्य है, सत्यव्रतम सत्यपरं त्रिसत्यम यानि त्रिकालाबाधित सत्य अर्थात तीनों कालों से परे का सत्य जो अतीत वर्तमान और भविष्य तीनो कालो में रहे । इसलिए सत्स्वरूप श्री भगवान की मृत्यु संभव नहीं, और उनके संस्कार आदि के सन्दर्भ में जो कुछ भी कुत्सित भ्रम फैलाया जा रहा है,...